सामाजिक

विरासत, मेहनत और कामयाबी

आज का दौर चुनौतियों से भरा है। बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक असमानता ने लाखों युवाओं के सपनों को कुचल दिया है। सोशल मीडिया पर चमकती ज़िंदगियां देखकर वे अपनी क़िस्मत को कोसते हैं और शिकायत करते हैं कि उन्हें जन्म से न धन-दौलत मिली, न संपत्ति की विरासत। लेकिन एक साधारण सा वाक्य इस भ्रम को तोड़ता है: जिन लोगों को विरासत में पैसा नहीं मिलता, उन्हें विरासत में मेहनत मिलती है। यह संदेश न केवल प्रेरक है, बल्कि जीवन की कठोर सच्चाई को उजागर करता है। यह उन नौजवानों के लिए मशाल की तरह है जो ग़रीबी की बेड़ियों को तोड़कर अपनी और अपने परिवार की तक़दीर बदलना चाहते हैं। भारत जैसे विकासशील देश में जहां 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और लाखों युवा रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। विरासत का अर्थ सिर्फ़ भौतिक संपदा तक सीमित नहीं। ईश्वर ने हर व्यक्ति को अनोखी नेमतें दी हैं, मज़बूत हाथ, तेज़ दिमाग़, अटल इरादा और अंतहीन संभावनाएं। मेहनत ऐसी विरासत है जो कभी समाप्त नहीं होती। जितनी बार आप इसे आज़माते हैं, उतनी ही यह मज़बूत होती जाती है, जैसे धूप में पगड़ी की छांव बढ़ती जाती है। यह वही शक्ति है जो परिवार को ग़रीबी की दलदल से खींचकर समृद्धि के किनारे पहुंचा सकती है। इसे बोझ न समझें, बल्कि सुनहरा अवसर मानें। इतिहास इसकी गवाही देता है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म तमिलनाडु के एक गरीब मुस्लिम परिवार में हुआ। अख़बार बांटने से लेकर भारत के मिसाइल मैन और फ़िर राष्ट्रपति बनने तक का सफ़र मेहनत की मिसाल है। इसी तरह धीरूभाई अंबानी ने गुजरात की छोटी सी दुकान से रिलायंस जैसे साम्राज्य की नींव रखी। ये उदाहरण साबित करते हैं कि विरासत में मिली मेहनत किसी भी ऊंचाई को छू सकती है।
ज़िंदगी हर इंसान को कम से कम एक बार क़िस्मत पलटने का सुनहरा मौका जरूर देती है। चाहे आप गांव का किसान का बेटा हों, छोटे शहर की फैक्ट्री में मज़दूर या मध्यमवर्गीय परिवार से निकले छात्र। आज अगर हालात कठिन हैं, नौकरी नहीं मिल रही, पढ़ाई का खर्च न उठ पा रहा हो या पारिवारिक ज़िम्मेदारियां कंधों पर भारी पड़ रही हों, तो इसे ईश्वरीय संकेत समझें। अब जागने का समय है। इस अवसर को गंवाना न केवल व्यक्तिगत हार होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों से बेईमानी होगी। एक किसान बीज बोता है, जो कल हरे-भरे खेत बन जाता है। ठीक वैसे ही आपकी आज की मेहनत कल आपके बच्चों की मजबूत नींव बनेगी। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के आंकड़ों के अनुसार भारत में 4 करोड़ से अधिक युवा बेरोज़गार हैं। लेकिन यही युवा अगर मेहनत को अपनाएं तो देश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकते हैं। कामयाबी का असली मतलब सिर्फ़ धन कमाना नहीं। यह वह ऊंचाई है जहां आपका अतीत आपके वर्तमान पर गर्व करे। इतनी मेहनत करें कि आपकी सफ़लता मोहल्ले से निकलकर शहर, राज्य और पूरे देश में गूंज उठे। ठाकरे बंधुओं ने मुंबई की गलियों से निकलकर ठाकरे ग्रुप बनाया। चीन के जैक मा ने छोटे से अपार्टमेंट से अलीबाबा जैसा वैश्विक साम्राज्य खड़ा किया। सिफ़र से शुरू होकर शिख़र छूना न केवल व्यक्तिगत विजय है, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा। यह लाखों युवाओं को संदेश देता है कि नामुमकिन कुछ नहीं। जब आप ग़रीबी से लड़ते हुए सफ़ल होते हैं, तो आप मिसाल बन जाते हैं।
हर जिंदगी एक ख़ाली किताब है। कुछ लोग दूसरों की लिखी कहानियों का हिस्सा बनकर शिकायतें करते रहते हैं। लेकिन सच्चे विजेता अपनी दास्तान ख़ुद रचते हैं। आज ही फ़ैसला लें, हालात को बदलने का संकल्प। क़लम को अपने हाथ में थामें। हर बाधा को मोड़ बनाएं। ऐसी कहानी लिखें जिसमें आप ही नायक हों, जो ग़रीबी से सल्तनत बनाए, जद्दोजहद से फ़तह हासिल करे और मेहनत से अमर नाम कमाए।
अंत में, विरासत का धन क्षणिक सुख दे सकता है, लेकिन मेहनत कको स्थायी सम्मान, पहचान और गौरव प्रदान करता है। यह कोई छीन नहीं सकता। इसलिए हिम्मत न हारें। बहाने त्यागें। मेहनत को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाएं। हर सुबह नई जंग लड़ें। ऐसी शानदार ज़िंदगी रचें जो न केवल आपको अमर कर दे, बल्कि दुनिया को लंबे समय तक याद रहे। आपकी संतानें गर्व से कहेंगी,मेरे पूर्वजों ने ख़ाली हाथों से इतिहास रचा।

— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह सहज़

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।