मां
मां कभी मुस्कुराना नहीं भूलती थी,
तकलीफ़ में थी पर हमें
खुशियां बाटना नहीं भूलती थी।
अब वो नहीं है दुनिया में मगर,
अब भी हम तकलीफ में हो तो,
सपनों में दिलासा दिलाना नहीं भूलती।
जाने कैसा रिश्ता है मां का,
जोड़ती है घर को सदा,
याद रखती है सबको सदा,
खुद को याद करना बस भूलती ।
— कामनी गुप्ता
