कविता

पुरूषोत्तम मास

पुरूषोत्तम मास की दिव्य महिमा गाते सद्गुरु संत,
देता है यह अधिक माह पुण्य कर्मों का फल अनंत,
सूर्य संक्रांति से वंचित होकर इसको सबने ठुकराया,
विवाह शुभादि कर्मों से त्याज्य हो मलमास कहलाया ।

दुःखी होकर अधिक मास ने करी प्रार्थना श्रीकृष्ण से,
मुक्त करो हे परमेश्वर ! मुझको इस असहाय कष्ट से,
प्रसन्न हो दयालु श्रीहरि ने मलमास को गले लगाया,
अनन्य कृपा से ही माधव की पुरूषोत्तम मास कहाया ।

आंवला पीपल वृक्ष की इस माह पूजा विशेष फलदाई,
भक्तों ने श्रद्धा रखकर हरि चरणों में वंदना प्रेम से गाई,
भक्त तन-मन से करते 30 दिनों की सुखदाई साधना,
प्रभु के पुरूषोत्तम स्वरूप का करते चिंतन आराधना ।

गीता जी के 15वें अध्याय का पठन-पाठन हो विशेष,
भक्तों पर होती पुरूषोत्तम प्रभु की कृपानिधि अशेष,
पापनाशिनी ऊर्जा बढ़ें आत्मा के तेज में वृद्धि बहुगुणा,
जप तप सत्संग ध्यान दान धर्म का पुण्य हो कई गुना ।

एक माह की सात्विक अर्चना से कष्टों से हो किनारा,
भगवान विष्णु को यह पुरूषोत्तम मास हैं बहुत प्यारा,
तीन साल के इंतजार पर आता है यह शुभ अवसर,
आत्म “आनंद” आत्म शुद्धिकरण में हो जाओ तत्पर ।

— मोनिका डागा “आनंद

*मोनिका डागा 'आनंद'

चेन्नई, तमिलनाडु

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