नशा अभियान से अनुभव तक
नशामुक्ति अभियान का बड़ा भव्य आयोजन था,
कॉलेज के छात्रों के हाथों में पोस्टर लिये खड़े थे!
पोस्टर पर स्लोगन लिखा था
नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो
“दारू और सिगरेट से दूरी बनाओ!
मंच तमाम नेताओं और समाजसेवी से सजा था,
और मुख्य अतिथि क्षेत्र के लोकप्रिय नेता जी बने थे!
कुछ देर बाद भौकाल बनाते गाड़ी आ गई,
तगड़े आगमन के साथ नेता जी उपस्थिति ने चार-चाँद लगा दिया!
दो कार्यकर्ता दाये से पकड़े,
दो बाये से संभाले,
तब कहीं लोकतंत्र मंच तक पहुंचा
आयोजक मुस्कुराकर बोले
“सर,सीधे फीता काट दो
भाषण का क्या लोग वैसे समझ रहे हैं!
मीडिया वाले सब अपने हिसाब से लिख-पढ़ लेंगे,
विधायक जी ने कैंची पकड़ने की तीन कोशिश कीं
पहली बार फीता बच गया,
दूसरी बार कार्यकर्ता लल्लूलाल बच गया,
तीसरी बार जाकर अभियान का उद्घाटन सफल हुआ।
तालियां इतनी जोर से बजीं
मानो जनता नशामुक्ति नहीं,
नेता जी के नाना कला का प्रदर्शन देख रही हो।
उन्होंने माइक पकड़ा बोले
“युवाओं को नशे से दूर रहना चाहिये,
इतना कहकर खुद ही कुर्सी से दूर हो लिये,
आयोजकों ने तुरंत कार्यक्रम समाप्त घोषित किया!
आयोजकों को खर्चा-पानी देकर कार की ओर निकल लिये,
कार में बैठते ही नेता जी ने लंबी सांस खिंचा और अपने सहयोगी से बोले
“लल्लूलाल बिना सिगरेट के शराब का भी कोई मज़ा नहीं है,
सहयोगी बोला
“सर,धीरे बोलिये बाहर सब खड़े हैं
नेता जी बोले
“अरे जनता के लिये नशा अभियान है,
तो हमारे लिए अनुभव!
— अभिषेक कुमार शर्मा
