गीतिका/ग़ज़ल

कहो तो सही

प्यार में सब गवारा, कहो तो सही।
कर के कोई इशारा, कहो तो सही।।

डूबती नाव को भी किनारा मिला।
तुमने कब है पुकारा, कहो तो सही।।

राह में लाख अँधियार का सिलसिला।
दूँ बिछा चाँद-तारा, कहो तो सही।।

झूठ के दौर में सच अकेला रहा।
किसने उसको सँवारा, कहो तो सही।।

ज़िन्दगी भर मुहब्बत निभानी हमें,
वार दूँ हर सहारा, कहो तो सही।।

दिल में जो हो शिकायत, कहो बेझिझक।
दर्द को क्यों पुकारा, कहो तो सही।।

इश्क़ की राह में हार मानी नहीं।
हमने हर पल निहारा, कहो तो सही।।

हमने माँगा नहीं है वफ़ाओं का हक़,
हमने दामन पसारा, कहो तो सही।।

प्यास बढ़ती रही उम्र भर प्रेम की।
किसने अमृत उतारा, कहो तो सही।।

ऐ ‘मृदुल’ वार दीं सारी खुशियाँ मगर,
अब बचा क्या हमारा, कहो तो सही।।

— मंजूषा श्रीवास्तव “मृदुल”

*मंजूषा श्रीवास्तव

शिक्षा : एम. ए (हिन्दी) बी .एड पति : श्री लवलेश कुमार श्रीवास्तव साहित्यिक उपलब्धि : उड़ान (साझा संग्रह), संदल सुगंध (साझा काव्य संग्रह ), गज़ल गंगा (साझा संग्रह ) रेवान्त (त्रैमासिक पत्रिका) नवभारत टाइम्स , स्वतंत्र भारत , नवजीवन इत्यादि समाचार पत्रों में रचनाओं प्रकाशित पता : 12/75 इंदिरा नगर , लखनऊ (यू. पी ) पिन कोड - 226016