कविता

ख़ाकी, काला, सफेद कोट

ख़ाकी वर्दी कानून की रखवाली का मान,
काला कोट देता न्याय का सम्मान।
सफेद कोट जीवन का करता है उपचार,
इनसे उलझो मत, यही है बुज़ुर्गों का विचार।

ख़ाकी से टकराओगे तो नियम याद आएँगे,
काले कोट में सच-झूठ के फ़ैसले हो जाएँगे।
सफेद कोट से मिलोगे तो जीवन मुस्काएगा,
सम्मान करोगे तो हर रिश्ता निभ जाएगा।

ख़ाकी का धर्म है सुरक्षा का अभियान,
काले कोट का उद्देश्य न्याय का सम्मान।
सफेद कोट मानवता की सबसे बड़ी पहचान,
तीनों का आदर करना है हर नागरिक का मान।

दुश्मनी करोगे तो मुश्किलें बढ़ जाएँगी,
दोस्ती में भी मर्यादा ही राह दिखाएगी।
कर्तव्य निभाने वालों का सम्मान ही करो,
सच्चाई और सद्भाव का जीवन में वरण करो।

ख़ाकी, काला, सफेद-तीनों सेवा के प्रतीक,
समाज को देते रहते हैं सुरक्षा, न्याय और सीख।
बड़ों की सीख हमेशा जीवन में अपनानी,
ना दोस्ती अच्छी, ना दुश्मनी-बस सम्मान की है कहानी।

— किशन सनमुखदास भावनानी

*किशन भावनानी

कर विशेषज्ञ एड., गोंदिया

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