प्रकृति की गोद में
ओस की बूँद
पत्ती मुस्काई
भोर जागी
नभ नीला है
पंछी गुनगुनाएँ
मन महके
नदी बहे
लहरें गाएँ
सपने तैरें
शीतल पवन
वन मुस्काए
फूल झरें
बादल आए
धरती हँसी
सुगंध बिखरी
सूर्य किरण
जीवन खिले
प्रकृति अमर
— डॉ. अशोक
ओस की बूँद
पत्ती मुस्काई
भोर जागी
नभ नीला है
पंछी गुनगुनाएँ
मन महके
नदी बहे
लहरें गाएँ
सपने तैरें
शीतल पवन
वन मुस्काए
फूल झरें
बादल आए
धरती हँसी
सुगंध बिखरी
सूर्य किरण
जीवन खिले
प्रकृति अमर
— डॉ. अशोक