कविता

बोलना

कम बोलना भी कला है
जीवन का घोटे जैसे गला है।
खूब तरक्की समझते कुछ ऐसे,
मैंने जाना ये सिर्फ एक सज़ा है।

छोड़कर खुलेपन को
तुमने खुद को कुछ लक्षणों में बाँध लिया,
खुद को ना पहचाना
लोगों ने कहा जैसे मान लिया।

खुद को भूल जाना मौत सा जीवन हुआ,
कम बोलना कुछ जगह पर समझदारी जान लिया।
अपनों में मौन रहना कहूँ होशियारी,
नहीं अपनों की भली, बस है कपटधारी।।

सुरेन्द्र कल्याण बुटाना

सुरेन्द्र कल्याण बुटाना

करनाल, हरियाणा मो.: 8708889653 ईमेल: surenderkalyan007@gmail.com

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