कविता

हर ख़्वाब परिपूर्ण नहीं होता

चाहने से हर ख़्वाब,तक़दीर का हिस्सा नहीं होता,
हर मुस्कान के पीछे,ख़ुशियों का किस्सा नहीं होता।
दिल तो चाहता है,हर मंज़िल कदमों में आ जाए,
मगर हर सफ़र का अंत,मनचाहा जैसा नहीं होता।

पाना तो हर इंसाँ,जहाँ की दौलत चाहता है,
मगर वक़्त हर किसी का,एक-सा कहाँ रहता है।
कभी किस्मत इम्तिहान लेती,कभी हालात रोक लेते,
क़भी हालात तो क़भी वक़्त साथ नहीं देता

जो बिखरकर भी सँभल जाए,वही सच्चा मुसाफ़िर है
जो गिरकर फिर उठ खड़ा हो,वही जीवन का माहिर है।
अँधेरों की रात जितनी भी,लंबी क्यों न हो जाए
उम्मीद का सूरज आखिर,हर सुबह फिर ज़ाहिर है।

धैर्य की राह पर चलना,सबसे बड़ी कमाई है
मेहनत की हर बूँद ने ही,सफलता की फसल उगाई है।
जो विश्वास नहीं खोता,वह मंज़िल पा ही लेता है,
ईश्वर की हर देरी में भी,गहरी भलाई क़ा लम्हाँ होता है

हें किशन,न शिकवा रखो,न किस्मत को दोष दिया करो,
हर पल, वक़्त का प्रसाद समझ,मुस्कुराकर जिया करो।
जो आज नहीं मिला,कल उससे बेहतर मिल जाएगा,
विश्वास का दीप जलाकर,जीवन-पथ पर बढ़ा करो।

— किशन सनमुखदास भावनानी

*किशन भावनानी

कर विशेषज्ञ एड., गोंदिया

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