कठिन काम है
हाल दिल का छुपाना कठिन काम है।
दिल से दिल को मिलाना कठिन काम है।।
दर्द की धूप में हँस के जीते रहे।
गीत खुशियों के गाना कठिन काम है।।
झूठ के जाल में लोग उलझे रहे।
सच की राहों में आना कठिन काम है।।
बात दिल की ज़ुबाँ तक न आए कभी।
हक़ मुहब्बत जताना कठिन काम है।।
नफ़रतों के घने दौर में आज भी।
प्यार की लौ जलाना कठिन काम है।
लोग सुनते हैं लेकिन समझते नहीं।
सच बयानी सुनाना कठिन काम है।।
दर्द को जीत कर यार हँसते रहो।
ज़िंदगी का तराना कठिन काम है।।
अश्क़ पीकर जो हँसता रहा है ‘मृदुल’,
हौंसला यह दिखाना कठिन काम है।
— मंजूषा श्रीवास्तव “मृदुल”
