मन में करुणा रखिए आवेश नहीं
अपने भीतर करुणा रखिए,आवेश को दूर बहा दीजिए,
बादल बनकर जीवन को शीतलता का वर दीजिए।
वर्षा की कोमल बूँदों से ही हर उपवन मुस्काता है,
गर्जन केवल शोर मचाता,प्रेम ही फूल खिलाता है।
जब मन में संवेदना जागे,रिश्तों में मधुमास उतरता है,
सूखी डाली का हर पत्ता फिर से हरियाली धरता है।
क्रोध क्षणिक अंगार बनकर अपने ही घर को जलाता है,
करुणा का निर्मल जल जीवन का हर ताप बुझाता है।
वाणी में यदि मधुरता होगी,मन का दर्पण स्वच्छ रहेगा,
सद्भावों का दीप जले तो हर अँधियारा क्षीण रहेगा।
कटु शब्दों की आँधी अक्सर विश्वासों को तोड़ देती है,
स्नेहिल भाषा की वर्षा टूटी डोरों को जोड़ देती है।
क्षमा जहाँ मुस्कान बनती,वहीं प्रेम का वृक्ष पनपता है,
दया जहाँ आधार बनती,हर मानव ऊँचा उठता है।
बल का सच्चा अर्थ वही है जो निर्बल को थाम सके,
जीत वही जो हर घायल मन को फिर से हँसना सिखा सके।
अपने भीतर करुणा का निर्मल सागर बहने दो,
आवेश के काले बादल को हर पल चुपचाप ढहने दो।
किशन पुष्प सदा वर्षा की ममता से ही खिलते हैं,
गर्जना नहीं,प्रेम की बूँदें ही संसार बदलते हैं।
— किशन सनमुखदास भावनानी
