कविता

अगस्त है अगस्त है

महीना बड़ा मस्त है,
सावन की तीसरी तिथि से-
जिसका हुआ है आगाज़ ,
जुलाई के अंतिम दिन -गुरु पूर्णिमा के संग,
कितना पावन और कितना शुभ,
व्यास पूजा और गुरुजनो की पूजा,
और उनसे मिला अथाह आशीर्वाद,
सब कितना शुभ और दिलचस्प है,
वाह वाह त्यौहार कितने ज़बरदस्त हैं,
सावन के पावन मॉस में,
हर हर भोले नाथ की हर और गूँज बार बार –,
और मंदिरों में शिव भक्तो की है भरमार-
शिव कृपा से सभी भक्त कितने मद मस्त हैं ,
अगस्त है,अगस्त है, , ,
महीना बड़ा मस्त है,

साथ में मनाएंगे हरियाली तीज,नाग पंचमी, ओणम
कजरी तीज,
किसान भी बो देंगे नए बीज,

पानी पानी जहाँ जहाँ बरसा
वहां सब कुछ अस्त-व्यस्त है,
सावन की एक फुहार को-
जहाँ जन मानस तरसा
वहां सब इन्दर देवता को,
कोसने में त्रस्त है,
मध्य में मनाएंगे राष्ट्रीय पर्व, –
जब भारत हुआ था आज़ाद ,
और
वाह वाह, शनिवार १५ अगस्त है,
रविवार की संग छुट्टी पाकर, बाबू-
मौज़ मस्ती में परस्त है,
पर आजकल के युवा और बच्चे
इन के कहाँ अभ्यस्त हैं,
-कोई टीवी कोई ट्वीटर,
कोई मोबाइल और कोई फेस बुक,
सबके सब अत्यंत अभ्यस्त हैं,
सावन का आयेगा अंत, रक्षा बंधन के संग,
भाई बहन का प्यार, दिलों में प्यार की उमंग,
हर और खुशियां ही खुशियां,
हर बहन भाई से पाकर उपहार मस्त है,
क्यों कि
अगस्त है अगस्त है,
महीना बड़ा मस्त है,
— जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया जन्म दिन --१४/२/१९४९, टेक्सटाइल इंजीनियर , प्राइवेट कम्पनी में जनरल मेनेजर मो. 9855022670, 9855047845

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