सामाजिक

पहली मित्रता

जीवन के सफर में इंसान अनगिनत रिश्तों से रूबरू होता है,कुछ खून के रिश्ते होते हैं, तो कुछ समय के साथ खुद-ब-खुद बन जाते हैं। लेकिन इन सबमें सबसे अनोखा, पावन और आत्मिक रिश्ता यदि कोई है, तो वह है,मित्रता का रिश्ता। और जब बात बच्चों की पहली मित्रता की हो, तो उसका आकर्षण और उसकी मासूमियत शब्दों की सीमाओं से परे हो जाती है।
बचपन की दोस्ती,,जहां स्वार्थ का कोई स्थान नहीं होता
वयस्कों की दुनिया में मित्रता अक्सर नफा-नुकसान, सामाजिक ओहदे या समान हितों की तराजू पर तौली जाती है। इसके विपरीत, बच्चों की दुनिया इन तमाम कृत्रिम दीवारों से कोसों दूर होती है।
निष्कपट भाव, बच्चों की पहली दोस्ती किसी योजना का हिस्सा नहीं होती। यह पार्क के झूले पर अचानक हुई मुलाक़ात, स्कूल की पहली बेंच पर शेयर की गई टिफिन की खुशबू, या मिट्टी के घरौंदे एक साथ मिलकर बनाने भर से शुरू हो जाती है।
बिना शर्तों का स्नेह,इस रिश्ते में कोई शर्त नहीं होती। यहाँ रंग, रूप, जाति या आर्थिक स्थिति कोई मायने नहीं रखती। उनके लिए तो बस साथ खेलना और एक-दूसरे की खिलौना-गाड़ी को साझा करना ही पूरी दुनिया होती है। वह अनमोल पल,,, जब मैं और अशोक एक थे
बचपन के उन दिनों के कई पल आज भी दिल के सबसे करीब है, जब हर चीज़ बेफिक्र और अपनी हुआ करती थी।
दोपहर की चिलचिलाती धूप हो या बारिश की फुहारें, हमारा ठिकाना हमेशा एक ही हुआ करता था,पुराने नीम के पेड़ की छांव या कच्ची गलियाँ। मुझे आज भी वह दिन अच्छी तरह याद है जब स्कूल से लौटते वक्त अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई थी। हमारे पास एक ही छोटा सा छाता था, जो दोनों को पूरी तरह ढंक नहीं सकता था।
ऐसे में अशोक ने बिना एक पल गंवाए अपना बस्ता अपनी छाती से लगाया, छाता मेरी तरफ़ झुका दिया और खुद भीगते हुए मुझसे हँसकर बोला,
“तू आज बीमार पड़ गया तो स्कूल की छुट्टी हो जाएगी, और मेरा खेलने का साथी कौन बचेगा? वो भीगता हुआ घर पहुंचा,,,
उसकी वह बेपरवाह हँसी, बारिश की बूँदों के बीच गूँजती उसकी आवाज़ और एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखकर घर तक का वह लंबा सफ़र,आज भी मेरी स्मृतियों में किसी अमूल्य रत्न की तरह चमकता है। वह पल छोटा था, लेकिन उसकी गहराई समंदर जैसी असीम थी।
दोस्ती की एक अनूठी मिसाल।
अशोक सिर्फ़ एक नाम या एक दोस्त नहीं था, बल्कि भरोसे का दूसरा नाम था। हमारी दोस्ती उम्र के हर पड़ाव के साथ और गहरी होती गई।
जब कभी मैं किसी बात पर टूटता या उदास होता, तो अशोक का यह कहना ही काफ़ी होता था,”फिक्र मत कर, तेरा भाई तेरे साथ है।”
उसने दोस्ती को एक ऐसा आयाम दिया जहाँ सुख-दुःख की लकीरें मिट जाती थीं। वह खुद की परवाह किए बिना अपने यार की खुशी के लिए हर हद पार करने को तैयार रहता था।
अब बस यादें शेष हैं…
वक्त का पहिया घूमा, रास्ते अलग हुए, और फिर ज़िंदगी ने एक ऐसा क्रूर मोड़ लिया जहाँ से अशोक इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गया।
आज जब भी मैं उन पुरानी जगहों से गुजरता हूँ, तो ऐसा लगता है जैसे हर कोने से अशोक की हँसी गूँज रही हो। वह भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी मौजूदगी का अहसास आज भी मेरी साँसों में बसा है। उसकी दी हुई यादें ही अब मेरा संबल हैं।
“कुछ लोग ज़िंदगी से चले जाते हैं, लेकिन दिलों में उनका ठिकाना हमेशा के लिए अमर हो जाता है।”
अशोक, तुम्हारी दोस्ती इस जीवन की सबसे बड़ी दौलत थी, और आज मित्रता दिवस के इस पावन अवसर पर तुम्हारी यादें ताउम्र इस दिल की धड़कन बनकर साथ रहेंगी।

— डॉ. मुश्ताक अहमद शाह ‘सहज’

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

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