भाषा-साहित्य

शब्दों की सुगंध और हमारा साहित्यिक प्रयास

साहित्य केवल शब्दों का जोड़ या कोरी कल्पनाओं का आख्यान नहीं है, बल्कि यह किसी भी राष्ट्र की अंतरात्मा की जीवंत आवाज़ है। जब भावों को भाषा का रूप मिलता है, तो वह सिर्फ़ पन्ने पर उकेरी गई इबारत नहीं रहती, बल्कि शब्दों की एक दिव्य सुगंध बन जाती है,ऐसी सुगंध जो काल और पीढ़ियों की सीमाओं से परे जाकर युगों-युगों तक मानवता को महकाती रहती है।
साहित्य, हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्राण
हमारी प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों का जो अमूल्य खज़ाना आज हमारे पास सुरक्षित है, उसके मूल में हमारा महान साहित्य ही है। वेद-पुराणों के श्लोकों से लेकर महाकाव्यों की ऋचाओं तक, लोकगीतों की गूंज से लेकर आधुनिक गद्य की बहुरंगी विधाओं तक यह सब हमारी साझा विरासत का गौरवशाली प्रमाण हैं।
साहित्य हमारी स्मृतियों का संरक्षक है।
यह हमें हमारे अतीत से जोड़ता है और भविष्य की राह दिखाता है।
यह वह आईना है जिसमें समाज अपने सुंदरतम और विद्रूप दोनों रूपों को स्पष्ट देख सकता है।
साहित्यिक प्रयास और हमारे हस्ताक्षर,,
हर युग में कुछ ऐसे प्रबुद्ध और संवेदनशील जीवट लोग हुए हैं जिन्होंने अपनी तपोमयी लेखनी से समाज को दिशा दी है। हमारे ये साहित्यिक हस्ताक्षर महज़ लेखक या कवि नहीं, बल्कि संस्कृति के प्रहरी और समाज के सच्चे शिल्पकार हैं।
तपस्या और साधना एक रचनाकार का जीवन केवल कागज़ और कलम का रिश्ता नहीं है, बल्कि वह समाज की पीड़ा, आनंद, संघर्ष और उल्लास को अपने भीतर आत्मसात कर उसे शब्दों में ढालने की एक कठिन तपस्या है।
पीढ़ी-दर-पीढ़ी सेतु, हमारे ये हस्ताक्षर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के दीप स्तंभ हैं। उनके द्वारा छोड़ी गई वैचारिक थाती हमें याद दिलाती है कि मनुष्यता के मूल मूल्य प्रेम, करुणा, न्याय और सत्य कितने महत्वपूर्ण हैं।
निरंतरता का संकल्प,साहित्यिक प्रयास एक बहती हुई धारा की तरह है, जो हर दौर में नए प्रस्फुटन और नए विचारों के साथ समाज को सींचती रहती है।
समर्पित,विभूतियों और पाठकों को
यह पावन साहित्यिक यात्रा अधूरी है बिना उन दो स्तंभों के, जिन पर यह टिकी है,हमारी महान साहित्यिक विभूतियाँ और सृजनधर्मी पाठकगण।
“लिखने वाले ने तो केवल भावों को पन्नों पर उतारा है, असली प्राण तो उसे पढ़ने वाले की संवेदना ने फूंके हैं।”
साहित्यिक विभूतियों को नमन जिन्होंने अपनी लेखनी से समाज को मूक दर्शक नहीं बनने दिया, बल्कि हर अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई और प्रेम के दीप जलाए। आपकी मेधा और साधना को हमारा शत-शत नमन।
प्रिय पाठकों को सत्कार,जो इन शब्दों की सुगंध को महसूस करते हैं, किताबों से नाता जोड़ते हैं और लेखक की कल्पना को अपनी भावना से जीवंत बनाते हैं। पाठक ही वह ऊर्जा है जो साहित्य के यज्ञ को निरंतर प्रज्वलित रखती है।
आइए, इस सांस्कृतिक धरोहर और शब्दों के इस अंतहीन सफ़र को मिलकर आगे बढ़ाएं। अपनी माटी की खुशबू और अपनी भाषा के गौरव को सहेजे रखें, क्योंकि जब तक शब्द जीवित हैं, तब तक हमारी संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का यह प्रकाश अमर रहेगा।

— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज

डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह

पिता का नाम: अशफ़ाक़ अहमद शाह जन्मतिथि: 24 जून जन्मस्थान: ग्राम बलड़ी, तहसील हरसूद, जिला खंडवा, मध्य प्रदेश कर्मभूमि: हरदा, मध्य प्रदेश स्थायी पता: मगरधा, जिला हरदा, पिन 461335 संपर्क: मोबाइल: 9993901625 ईमेल: dr.m.a.shaholo2@gmail.com शैक्षिक योग्यता एवं व्यवसाय शिक्षा,B.N.Y.S.बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस. बी.कॉम, एम.कॉम बी.एड. फार्मासिस्ट आयुर्वेद रत्न, सी.सी.एच. व्यवसाय: फार्मासिस्ट, भाषाई दक्षता एवं रुचियाँ भाषाएँ, हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी रुचियाँ, गीत, ग़ज़ल एवं सामयिक लेखन अध्ययन एवं ज्ञानार्जन साहित्यिक परिवेश में रहना वालिद (पिता) से प्रेरित होकर ग़ज़ल लेखन पूर्व पद एवं सामाजिक योगदान, पूर्व प्राचार्य, ज्ञानदीप हाई स्कूल, मगरधा पूर्व प्रधान पाठक, उर्दू माध्यमिक शाला, बलड़ी ग्रामीण विकास विस्तार अधिकारी, बलड़ी कम्युनिटी हेल्थ वर्कर, मगरधा साहित्यिक यात्रा लेखन का अनुभव: 30 वर्षों से निरंतर लेखन प्रकाशित रचनाएँ: 2000+ कविताएँ, ग़ज़लें, सामयिक लेख प्रकाशन, निरन्तर, द ग्राम टू डे, दी वूमंस एक्सप्रेस, एजुकेशनल समाचार पत्र (पटना), संस्कार धनी (जबलपुर),जबलपुर दर्पण, सुबह प्रकाश , दैनिक दोपहर,संस्कार न्यूज,नई रोशनी समाचार पत्र,परिवहन विशेष,समाचार पत्र, घटती घटना समाचार पत्र,कोल फील्ड मिरर (पश्चिम बंगाल), अनोख तीर (हरदा), दक्सिन समाचार पत्र, नगसर संवाद, नगर कथा साप्ताहिक (इटारसी) दैनिक भास्कर, नवदुनिया, चौथा संसार, दैनिक जागरण, मंथन (बुरहानपुर), कोरकू देशम (टिमरनी) में स्थायी कॉलम अन्य कई पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर रचनाएँ प्रकाशित प्रकाशित पुस्तकें एवं साझा संग्रह साझा संग्रह (प्रमुख), मधुमालती, कोविड, काव्य ज्योति, जहाँ न पहुँचे रवि, दोहा ज्योति, गुलसितां, 21वीं सदी के 11 कवि, काव्य दर्पण, जहाँ न पहुँचे कवि (रवीना प्रकाशन) उर्विल, स्वर्णाभ, अमल तास, गुलमोहर, मेरी क़लम से, मेरी अनुभूति, मेरी अभिव्यक्ति, बेटियां, कोहिनूर, कविता बोलती है, हिंदी हैं हम, क़लम का कमाल, शब्द मेरे, तिरंगा ऊंचा रहे हमारा (मधुशाला प्रकाशन) अल्फ़ाज़ शब्दों का पिटारा, तहरीरें कुछ सुलझी कुछ न अनसुलझी (जील इन फिक्स पब्लिकेशन) व्यक्तिगत ग़ज़ल संग्रह: तुम भुलाये क्यों नहीं जाते तेरी नाराज़गी और मेरी ग़ज़लें तेरा इंतज़ार आज भी है (नवीनतम) पाँच नए ग़ज़ल संग्रह प्रकाशनाधीन सम्मान एवं पुरस्कार साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त पाठकों का स्नेह, साहित्यिक मंचों से मान्यता मुश्ताक़ अहमद शाह जी का साहित्यिक और सामाजिक योगदान न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे हिंदी-उर्दू साहित्य जगत के लिए गर्व का विषय है। आपकी लेखनी ने समाज को संवेदनशीलता, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जोड़ा है। आपके द्वारा रचित ग़ज़लें और कविताएँ आज भी पाठकों के मन को छूती हैं और साहित्य को नई दिशा देती हैं।

Leave a Reply