बारिश और चाय
बारिश, चाय और ढेर सारी वो बेमतलब बातें,
कभी -कभी बहुत याद आती हैं वो मुलाकातें।
तुम अगर कहते तो हम कभी न जाते छोड़ कर,
तुमने लाकर खड़ा कर दिया था हमें ऐसे मोड़ पर।
आज भी बारिश होती है ,बूंदों की खन-खन भी,
चाय भी होती है और बातें भी पर अपनापन नहीं।
कभी सोचती हूँ क्या तुम भी ऐसे ही याद करते हो,
बारिश और चाय सामने हो हमारी बात करते हो।
कुछ रिश्ते भले कुछ पल के लिए होते हैं हमारे लिए,
पर मन के किसी कोने में बस जाते हैं जब तक जीएं।
— कामनी गुप्ता
