।। पुरानी यादें ।।
वो दिन भी कितने अजीब थे
जब हम तेरे करीब थे ।
ना किसी को पाने की जिद थी
ना किसी को खोने का डर था ।
बस हम उम्र हाइट थी और मस्ती भरी फाइट थी ।
वह जल्दी स्कूल जाकर अंताक्षरी खेलना,
और कभी-कभार छुट्टी करके गार्डन में टहेलना ।
वह दोस्तों के लिए मॉनिटर से भिडना,
फिर सेलिब्रेशन के टाइम उन्हें छेड़ना ।
स्ट्रीक टीचर की बाते ना मानना,
और फ्रेंड्स के साथ रिसेस से पहले टिफिन खाना ।
वह सारे दोस्तों की मेरे प्रति यारी,
और मेरे साथ ना होने
वह सवेरे- सवेरे जबरदस्ती का नहान
और कभी-कभी तबीयत खराब का बहाना ।
वह दो चोटी के लिए ड्रामा करना,
और सर के पीट-पीछे कारनामें करना ।
वह एग्जाम की टेंशन, और पेरेंट्स मीटिंग में पापा की अग्रेशन ।
वह सारे दोस्तों की मेरे प्रति यारी,
और आज साथ ना होने की खुद्दारी ।
पर याद आते रहेंगे वह हसीन पल,क्योंकि जैसा भी था ।
खूबसूरत था हमारा गुजरा हुआ कल ।
— एकता धोगालिया
