हास्य व्यंग्य

यह देखते देखते देखना, एक दिन मैं भी मरूंगा

उस प्रभु से, ईश्वर से, नारायण से, परमात्मा से, खुदा से, वाहे गुरु से, मालिक से, सर्वे सर्वा से कभी कुछ भी मत मांगिए, जो भी मिला है, जो भी दिया गया है, बस उसका सदा ही शुक्राना कीजिये, धन्यवाद दीजिए, कृतज्ञ रहिए क्योंकि, यह सब एक विशेष व्यक्ति की आत्मा में आजादी से लेकर आज तक विराजित हैं और उससे प्रेम बढाइये, स्तुति करिए, समर्पण कीजिए और वंदना कीजिए फिर देखिए आपके साथ क्या क्या नहीं ? क्या क्या कमाल होता है अगर आपने अपनी आजादी की अभिव्यक्ति का उपयोग करके इनके खिलाफ कुछ बोल दिया तो समझिए आपका बीपीएल छिन लिया जाएगा। ज्यादा तेज चलने लगें तो किसी भी समय एनकाउंटर हों जायेगा अगर आपको सड़क पर कोई छोटे-छोटे या फिर बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई दे तो नज़र अंदाज़ करके चलते रहना नहीं तो आपके साथ कोई लफड़ा हो सकता है। कहीं किसी जगह एक्सीडेंट दिखाई दे तो ख़ामोशी के साथ निकल जाना नहीं तो किसी क़ानूनी दांव-पेंच में उलझ जाएंगे। किसी भी सरकारी या प्राइवेट अस्पतालों में धृतराष्ट्र की भांति अपना इलाज करवा लेना बहस मत करना और जो दवाईयां लिखीं हैं उसे बाज़ार से ख़रीद लेना अस्पताल वालों से मांगना मत क्योंकि, उन्हें सिर्फ अपने अस्तित्व के साथ लक्ष्मी की चिंता है बिमारी और मरीजों से कोई लेना-देना नहीं है। किसी भी सरकारी या निजी विभाग का काम पड़ जाएं तो वहां कार्यरत अधिकारियों, कमर्चारियों को भेंट स्वरूप समय समय पर पर्याप्त रूप से अर्थ देते रहना चाहें चप्पल घिस जाए या फिर सर की छत ही क्यों ना बिक जाएं। भले ही घर के सदस्य भुखे ही सो जाएं, मर जाएं बस उनका पेट भरा रहना चाहिए। ऐसी कई कालजयी जगह है जहां इनका दबदबा आज भी अटुट विश्वास की तरह विशाल नेटवर्क के रूप में कायम है क्योंकि, यही तो इनके इनकम के मुख्य साधन है इनके अलावा ऐसे कई स्थान है जिसका नाम, पता आम नागरिकों को मालूम तक नहीं है जिन्हें कुछ लोग दो नंबर वाला काम कहते हैं। साथ ही कई ऐसे ऐसे इनके स्थान है जहां पर इनकी तूती बोलती है खासकर सरकारी एवं प्राइवेट विभागों में मिस्टर इंडिया तरह कई प्रकार से एक बत्ती कनेक्शन की तरह तार जुड़े हुए है। इनकी छत्रछाया में छोटे से छोटे और बड़े से बड़े उद्योगपति, व्यवसाई, कई इंडस्ट्रीस्यों के मालिक, बड़े-बड़े लोग, अभिनेता, मुस्टंडे, गुंडे जैसे अनेक बिना किसी डर और भय के अपने-अपने काम धंधे पर ध्यान दे कर अपनी अपनी सफलता का परचम लहरा रहे हैं और विलासितापूर्ण जीवन यापन अपने उस आका का आदेश मानकर कर रहे हैं और अपने कार्य को और अधिक से अधिक बढ़कर अपना व्यापार, व्यवसाय भी बड़ा रहें हैं। इसमें किसी भी प्रकार की दो राय व्यक्त नहीं की जा सकती है। इनकी पनाहगाह में दिल से, आत्म से, मनोभाव से आपको भर भर कर मिलेगा तथा अपनी हैसियत से अधिक और अपनी काबिलियत से ज्यादा और तो और कल्पना से भी कहीं ज्यादा से ज्यादा रकम मिलती रहेगी इसलिए सदा इनकी स्तुति करते रहीयें यह ओर कोई नहीं हमारे आस-पास रहने वाला कर्मठ, ईमानदार, सेवा भावी की बात सदैव करने वाले वो जिम्मेदार व्यक्ति, शख्स हैं जिसकी छत्रछाया में सब कुछ फल-फूल रहा है इनकी इस प्रकार की पद प्राप्ति, सफलता आदि आदि देखते देखते, सुनते सुनते मैं असहाय, लाचार की तरह एक दिन मर जाऊंगा। जिस तरह से आज आम आदमी, आम नागरिक, मजदूर, किसान अपने मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एड़ी चोटी का जोर वर्तमान हालातो में लगा रहा हैं उसको देखते हुए परिणाम ऊंट के मुंह में जीरा आ रहा है और सफलता तो सफलता के नाम से कोसों दूर खड़ी है जिसका अभी तक कोई नामो निशान नहीं दिखाई दे रहा है। आखिर करें तो क्या करें ? बस भूख, भय और भ्रष्टाचार जैसे कई राक्षसों के साए किसी बकरे की तरह अपनी मौत का इंतजार कर रहे है। सहाब यह सच किसी सच से कम नहीं है। सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक क्षेत्रों में नजरों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी अगर हम नजर घुमाएंगे तो जन आंदोलन, उग्र आंदोलन, भूख हड़ताल, तालाबंदी, काम बंद, जागरूकता अभीयान, धरना, प्रदर्शन जैसे कई प्रकार का अभियान समय समय पर इन क्षेत्रों के जिम्मेदार नेता द्वारा कार्यक्रम चलाए जाते है इसमें गवाह के रूप में सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रिक मीडिया भी रहती है। यह नेता गण सिर्फ इसमें अपना अभिनय करके एक किरदार के रूप में अपने कर्तव्य, अधिकार, दायित्व को औपचारिकता के साथ निभा कर अपना काम निकाल कर नाम कमा लेंगे साथ में परिणाम स्वयं के लिए निकलेंगे और जनता के लिए ढांक के तीन पात आएंगे। इतने सारे घटनाक्रम को पिछले पचास वर्षों से किसी बिमारी की तरह देखता और इलाज सुनता आ रहा हूं इतना सब-कुछ जानने के बाद बस मैं अपने मन की बात में यही बात कहना चाहता हूं कि इन्हें देख-देख कर मै एक दिन मर जाऊंगा समाधान का इंतजार करते करतें जैसे मेरे पूर्व में स्वर्ग के निवासी हों चुके हैं लेकिन, व्यवस्था कहीं से भी सुधारने का नाम ही नहीं ले रही है। नासूर बनकर और सब अपने स्वार्थ, अपनी व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए लगे रहो मुन्ना भाई की तरह काम पर लगे हुए हैं। इस संदर्भ में, इस विषय में किसी के भी पास में समय नहीं भैया जी। आपने सब कुछ बताकर इस विषय का सारा वृत्तांत रामायण से लेकर महाभारत जैसा व्याख्यान अपने कर दिया। आखिर उस विशेष व्यक्ति का नाम क्या है ? दिल खोलकर भी उन श्रीमान जी का नाम बता दो तो मेरे जीवन पर भागीरथ उद्धार हो जाएगा और आने वाले भविष्य का भविष्य सुधर जाएगा। अपना हाथ दिल पर रखकर कान खोल कर सुन लो उसे विशेष व्यक्ति का नाम नेता है जिनके पनाहगाह में, शरण में, सानिध्य में हर तरफ उत्थान, चमत्कार, उन्नति जैसे विकास सतत् हों रहें हैं।

— प्रकाश हेमावत

प्रकाश हेमावत

मकान नंबर 5 गली नंबर 5 बुध्देश्वर मंदिर की तरफ टाटा नगर रतलाम मोबाइल नंबर 93015 43440

Leave a Reply