गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

लिखे तुमको ख़त याद तुमको नही है।
कहो बात मेरी सनम क्या सही है।।

जली रात भर मैं तो शम्मा के जैसी।
मगर बात पर तू ही कायम नही है।।

भुला कर गया सारे तू कसमें वादे।
किया फैसला तूने जो क्या यही है।।

जहांँ मेरा वीरान तेरे बिना है।
बसेरा तेरा जो मेरा भी वही है।।

मुझे छोड़ कर तू किधर को चला यूंँ।
तेरा दिल मेरे पास औ तू कही है।।
— प्रीती श्रीवास्तव

*प्रीती श्रीवास्तव

पता- 15a राधापुरम् गूबा गार्डन कल्याणपुर कानपुर

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