कुण्डलिनी छंद
अफसाना बनना नहीं, नाहक लगे कलंक।सोते जगते ही चुभे, नाहक में ही डंक।।नाहक में ही डंक, मगन सुनना बस गाना।और मुबारक आप, बने कोई अफसाना।।१५२गाँधी के हथियार को, सदा दीजिए मान।सत्य अहिंसा साधना, नहीं मान अनुदान।।नहीं मान अनुदान, बने अहिंसा आँधी।श्रद्धा के दो पुष्प, समर्पित करिए गाँधी।।१५३मानवता के मीत बन, करो नेक कुछ काम।होंगे बिल्कुल भी नहीं, आप कभी बदनाम।।आप कभी बदनाम, सभी को अच्छा लगता।लिखो आप इतिहास, करो अब से मानवता।।१५४चीनी कम की फ़िक्र में, दुबले मत हो यार।अपने तन से भी करो, आप तनिक तो प्यार।।आप तनिक तो प्यार, चाहते बनना दीनी।उत्तम चाहो स्वास्थ्य, त्याग दो अब तुम चीनी।।१५५रहना उससे दूर, हाथ में खंजर जिसके।मत करना विश्वास, भला ये होते किसके।।कहें मित्र यमराज, मानिए मेरा कहना।अपने हित की बात, सोचते तुमको रहना।।१५६छोटी-छोटी बात में, अब लड़ जाते लोग।फैल रहा समाज में, जाने कैसा रोग।।जाने कैसा रोग, समझ है इतनी खोटी।उलझे-उलझे लोग, बात मानें कब छोटी।।१५७
