हिन्दी दिवस
गम्भीरता का ओढ़ लबादा, आज फिर एक वर्ष बाद हिन्दी दिवस पर, फिर बैठा,,, अभिजात्य वर्ग । दे अँग्रेजी में
Read Moreगम्भीरता का ओढ़ लबादा, आज फिर एक वर्ष बाद हिन्दी दिवस पर, फिर बैठा,,, अभिजात्य वर्ग । दे अँग्रेजी में
Read Moreशांत, व्यवस्थित, योजनाबद्ध शहर । लिए आगोश में, प्राकृतिक नजारे। कल तक था मैं… इक स्मार्ट शहर ॥ आज …
Read Moreसुनो दस्तक … चाहे परिवर्तन अब नारी । बीता वो युग, जब थी नारी “केवल श्रद्धा । जो बन कठपुतली
Read Moreना जाने वो … क्या मजबूरी थी , या जद्दोजहद थी , धन कमाने की , खुद को आजमाने की
Read Moreहूँ अज्ञानी … अपने अल्पज्ञान का मुझे भान है । अपने सीखने की लगन पर मुझको भी अभिमान है ॥
Read More