लघुकथा – लौटते कदम
कल कोर्ट में आखिरी फैसला होने वाला था । ऑफिस से थोड़ा पहले निकल कर अमृता वकील से मिलने चली
Read Moreकल कोर्ट में आखिरी फैसला होने वाला था । ऑफिस से थोड़ा पहले निकल कर अमृता वकील से मिलने चली
Read Moreसुनहरी धूप अंतस्तल में समाई बीते दिनों की यादें संग लाई । आँगन में कभी अपनों के संग मस्ती करते
Read More“क्या सोच रही हो; मनुज के घर वालों से मिला जाये या नहीं ? सच में ! हमें शर्म आती
Read Moreआज रसोई घर में बड़ी उठा पटक हो रही थी। नन्हा राहुल अपने खिलौने से खेलना छोड़ कर रसोई घर
Read Moreहे माँ तेरी मोहनी छवि आँखों में बस जाये सुधबुध बिसरा कर मनवा तेरे ही गुण गाये कैसी लगन लगाई
Read More“माँ आपने छोटू भैया को अपने घर के अंदर क्यों नहीं आने दिया ?भैया आधी रात में कहाँ जायेंगें ।माँ
Read Moreचीटियों का सरदार मधुमक्खियों से बैर पाल लिया। वज़ह कुछ खास नहीं ,अपने बिल को थोड़ा बड़ा बनाने के चक्कर
Read Moreसुबह सवेरे अपनी तकदीर पर रश्क करता हूँ शाम होते ही पूराने साथियों तक पहुंच जाता हूँ चंद घंटों के
Read More