लघुकथा – करनी का फल (प्रतिशोध)
चीटियों का सरदार मधुमक्खियों से बैर पाल लिया। वज़ह कुछ खास नहीं ,अपने बिल को थोड़ा बड़ा बनाने के चक्कर
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Read Moreसुबह सवेरे अपनी तकदीर पर रश्क करता हूँ शाम होते ही पूराने साथियों तक पहुंच जाता हूँ चंद घंटों के
Read Moreकल्पना और यथार्थ में बड़ा फ़ासला होता है। कल्पना की उड़ान इंसान को मायानगरी में ले जाती है। ऐसी ही
Read Moreअतृप्त धरा अति अकुलाई वर्षा रूठ नभ में खिसियाई फूलों की डाली मुरझाई पौधों ने भी शोक मनाई । क्यों
Read Moreवह सोने की कोशिश कर रहा था परंतु उसे नींद नहीं आ रही थी। घर के सारे खिड़की दरवाजे उसने
Read Moreआँखों से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था आँखों में मोतियाबिंद उतर आया था । वे टटोलते हुए अपनी दवा
Read More“क्या सोच रही हो बेटा ; सारी परिस्थितियों पर गौर करने के बाद एकमात्र विकल्प अब तेरा विवाह ही बचा
Read Moreबड़ी देर से पार्क के एक कोने में बैठे उस जोड़े को देखकर उनकी आँखें चमक रही थी। कभी रोम-रोम
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