ग़ज़ल
फूल सा खिलने लगा हूँ आजकल, फक्र से उड़ने लगा हूँ आजकल। खूँ – पसीने से कमाई जब किया, काम
Read Moreथाल सजाकर बहन कह रही,आज बँधालो राखी। इस राखी में छुपी हुई है, अरमानों की साखी।। चंदन रोरी अक्षत मिसरी,
Read Moreआलोचना, समीक्षा या समालोचना का एक ही आशय है, समुचित तरीके से देखना जिसके लिए अंग्रेजी में ‘क्रिटिसिज़्म’ शब्द का
Read Moreजब से मूलभूत आवश्यकताओं के अभाव में लोगों के मरने की समस्या खत्म हुई है, मानव जनित एक नई समस्या
Read Moreशिवजी के धनुष पर विराजमान है काशी और गंगा मैया काशी की अधिकांश सीमा को समेट लेने के लिए धनुषाकार
Read Moreहे महादेव हे शिवशंकर, हे आशुतोष हे गिरिवासी । हे जगद्नियंता जगपालक, हम हैं अबोध अनुचर दासी ।। मद मत्सर
Read Moreघर – बाहर या प्लॉंट सड़क, हर जगह मौत के साये हैं। हमने ही तो आँख मूँदकर, घातक जाल बिछाये
Read Moreसाहित्य को समाज का दर्पण होना चाहिए अर्थात् समाज के चेहरे को हूबहू दिखाने के सामर्थ्य से सम्पन्न। सिर्फ इतना
Read Moreभगवान कीनाराम की जन्मस्थली माँ जान्हवी की गोद मना चहुँओर मोद जीयनपुर, चन्दौली जो था पहले बनारस वैश्विक संस्कृति का
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