ठहरो पल-दो-पल
इतनी जल्दी क्या है साजन, ठहरो पल-दो-पल।जनम-जनम के हम साथी हैं, बंधन अचल अटल।एक – दूसरे के हम दोनों, सुख
Read Moreइतनी जल्दी क्या है साजन, ठहरो पल-दो-पल।जनम-जनम के हम साथी हैं, बंधन अचल अटल।एक – दूसरे के हम दोनों, सुख
Read Moreबॉस हो जब सामने तो, मुस्कुराना छोड़ दो।साथ हो बीवी अगर, दूजी पटाना छोड़ दो। हाथ में है योग्यता-डिग्री-हुनर तो
Read Moreअब तू ही तो बता साथिया,तुझको छोड़ कहां मैं जाऊं? तू गंगा यमुना कावेरी,सी पावन शीतल निर्मल है।तू ही मेरे
Read Moreग़ज़ल औ सजल में लड़ाई न होती।अगर बात भाषा की आई न होती।। नया छंद कहकर रखा ग़ पे स
Read Moreराह तुम्हारी तकते-तकते,जाने कितने मौसम बीते! आंखों में हमने बोये थे,साथ-साथ रहने के सपने।किंतु तरुण मन कैसे जाने,सपने कभी न
Read Moreआवारा आंधी की तरहदहलीज़ के बाहर वाले छप्पर सेछेड़खानी करते हुएतेजी से गुजर जाने वाले अपनों मेंवह हवा भी शामिल
Read Moreमैं निकल पड़ा हूं बाजारों में अमन – चैन क्रय करने।भेदभाव के कठिन समय में, सबकी जय जय करने।।सबकी जय
Read Moreथाल सजाकर बहन कह रही,आज बँधालो राखी।इस राखी में छुपी हुई है, अरमानों की साखी।।चंदन रोरी अक्षत मिसरी, आकुल कच्चे-धागे।अगर
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