जीवन….
ये जीवन ! भावनाओं की बहती नदी है जहाँ एक ओर गर्भ में प्रेम और संवेदनाएं तो दूसरी ओर क्रोध
Read Moreसोच रहा मन इस अकेलेपन की तन्हाईयों में कल और आज में कितना फर्क है कल तक जो मुहब्बत का
Read Moreतुम्हारे एहसासों में खोया मन कभी अकेला ही नही होता माना दूर हो तुम पर तुम्हारी मेरी यादों की संयुक्त
Read Moreमन के अंतहीन हिस्से में परत दर परत उफनता तुम्हारे यादों का समंदर वक्त बेवक्त परिवर्तित हो उठता तूफान में
Read Moreबड़ी उदास थी वो न जाने कौन सा गम ?? समेट रखा था उसे आगोश में जबरन एकदम गुमसुम मैंने
Read Moreसोच रहा मन अकेलेपन की तन्हाईयों में कल और आज में कितना फर्क है कल तक जो मुहब्बत का दम
Read Moreन जाने क्यों?? आजकल अकेलापन भाने लगा है शायद ! इसकी वजह हो तुम वक्त के गुमसुम चेहरे पर अधखुली
Read Moreतुम्हारी मुहब्बत में…… एक किताब सी हो गई हूं मैं हर कोई देखकर चेहरा मेरा पढ़ लेता है हाले-दिल व्या…..
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