बलम बिकै चाहे सौत बिकै
युग -युग से चली आ रही प्रथाओं और परंपराओं को यों ही नहीं भुलाया जा सकता।ये प्रथाएँ और परंपराएं आदमी
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Read Moreहुक्का,गुटका,चिलम, तँबाकू।नर- जीवन के हैं सब डाकू।। हुक्के में जो धुँआ उड़ाता।नश्तर तन में स्वयं चुभाता।। सट-सट धुँआ चिलम से
Read Moreगीत गाते मरीं गाँव की गोरियाँ।गिरीं खेत में ज्यों वे भरीं बोरियाँ।। हमासी दानवों ने बहाया लहू,मिट गईं लुट गईं
Read Moreजिया अर्थ-उन्माद में, खोया जीवन-मोल।अहंकार भीषण बढ़ा,चक्षु ज्ञान के खोल।। अपनों से ही शत्रुता,अपनों से ही बैर,लौट वहीं पर आ
Read Moreआज तो ‘बात’ की बात करनी है।बात अपने बहुविध रूपों में हमें और हमारे जीवन को प्रभावित करती है।बात की
Read Moreजितने साँचे उतनी प्रतिमाशेष न रहती एक। कुंभकार है अद्भुत सृष्टासाँचे गढ़े नवीन।माटी भर -भर बना रहा हैलघु,पतली या पीन।।
Read Moreहिंदी से हमहम से हिंदीहम नहीं किसी भाषा से कम। माता जिसकीसंस्कृत पावनतन देवनागरी का प्यारा।जननी ने दीघोटी निज पयबहती
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