कविता क्या है
कविता आखिर है क्या खुद के अंदर घुमड़ते भावों का उदगार जो अंकित हो जाते है कागज के पन्नों पे
Read Moreकविता आखिर है क्या खुद के अंदर घुमड़ते भावों का उदगार जो अंकित हो जाते है कागज के पन्नों पे
Read Moreमैं आपको, अपने शहर और अपने मोहल्ले के भव्य शिव मंदिर जो कैलाश मंदिर के नाम से जाना जाता है,
Read Moreदेखो यह दीवानों तुम यह काम न करो पहन कर फटी जींस मम्मी पापा का नाम बदनाम न करो तुम्हें
Read Moreखोजना चाहता हूं खुद को क्या इसी तरह खोज पायूंगा सत्य से हूं मैं कोसों दूर खोजने चला हूं मैं
Read Moreअपूर्ण हूं अपूर्ण ही रहूंगा नित सीख रहा हूं सीखने की न कोई आयु न कोई सीमा हर सीख कुछ
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