न जाने कोई
क्या चलता किस के मन में जान नहीं सकता कोई कौन अपना कौन पराया बातों से पहचान सके नहीं कोई
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Read Moreमालूम है दुनियां है फानी आनी और जानी फिर भी डरता है यह मन इसीलिए तो कैद है न होता
Read Moreहैरान परेशान सा भटक रहा इधर उधर इस बियावान में ऐसे जैसे मृग फटकता फिरता है जंगल जंगल कस्तूरी को
Read Moreसारा जोर है अगली सांस पर आती है या रुक जाती है मुझे फिक्र नहीं डोरी तो टूटनी है फिर
Read Moreकविता आखिर है क्या खुद के अंदर घुमड़ते भावों का उदगार जो अंकित हो जाते है कागज के पन्नों पे
Read Moreमैं आपको, अपने शहर और अपने मोहल्ले के भव्य शिव मंदिर जो कैलाश मंदिर के नाम से जाना जाता है,
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