गुबरैला
हम अधिकतर लोग गांव से शहरों में आकर बसे हैं और कुछ एक का अभी भी गांवो से सम्बन्ध होगा
Read Moreजिंदगी शुक्रिया तेरा कितने सबब दिए तूने हर सबब लाजवाब तेरा तेरे सबबों से सीख कर पूरी कर रहा जीवन
Read Moreजीवन क्या है यह हो जाए वोह हो जाए यह मिल जाएं वो मिल जाएं यह सब अभिलाषा ही तो
Read Moreदुनियां है इक पागल खाना मैं भी पागल तुम भी पागल सब के सब यहां हैं पागल कोई पैसे को
Read Moreमौसम का मिज़ाज बदल रहा सर्द हवाओं का आगाज़ हो रहा बक्सों में बंद पड़े गरम कपड़ों का बाहर निकलने
Read Moreआत्मा की आवाज रह जाती है अनसुनी कई बार दब जाती है दबाबों में कभी मेरे कभी तेरे लाचार सिसकती
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