कौन हृदय की पीर सुनेगा?
कौन हृदय की पीर सुनेगा ,इस दुख के निर्जन कानन में ?घड़ी वेदना की निर्मम है, एक झंझावात सा है
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Read More[ गीत ]शहर के कोलाहल से,चलो प्रिये लौट चलें !गीतों के गाँव में,पीपल की छाँव में । कोयल अमराई हो,
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