दूर गाँव
दूर गाँव में मेरा घर है । मेरा एक प्रवास शहर है । मेरे बचपन की कुछ यादें । अपने
Read Moreसोच रहा हूँ ,एक कहानी लिख डालूँ । सोच रहा हूँ,पीड़ा का एक चित्र लिखूँ । सोच रहा हूँ,दुखड़ो को
Read Moreहोरी का गोदान कभी क्या हो पायेगा ? पाँच पाँच करके हैं बीते साल कई ।चोर उचक्के हुयें हैं मालामाल
Read Moreचहुँ दिशि दूर तलक फैला है,अंधकार का मेला । उसी निशा में टिमटिम करता दीपक एक अकेला । . एक अकेली नाव ,नदी के लम्बे दूर किनारे
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