द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी
तुम महामंत्र, पावन सुधा सी तुम हो जीवन की संजीवनी । योग साधना में हुई लीन जब कहलाई तुम माँ
Read Moreतुम महामंत्र, पावन सुधा सी तुम हो जीवन की संजीवनी । योग साधना में हुई लीन जब कहलाई तुम माँ
Read Moreराह के कंटक दूर हटाती माँ आंचल में फूल खिलाती माँ । तपती धूप में राहत देती है छाया बरगद
Read Moreतड़प उठती है माँ सुन बच्चे की चीख । सीने से लगाकर माँ जीने की देती सीख ।। वो माँ
Read Moreमाँ की परवरिश का नही कोई मोल माँ ही तो है, पहली गुरु अनमोल अशिक्षा अंधेरा तो उजाला है शिक्षा
Read Moreमाँ तो है सीप का मोती माँ हीं नेह का बीज बोती । सर पर रख देती है पल्लू जब-
Read Moreजंगल के राजा शेर ने एक सभा बुलाई । प्रहलाद की भक्ति होली की बात बताई ।। हम सभी खेलेंगे
Read Moreलल्ला के गाल रंग से हुए लाल । गली – गली में मचा रहे धमाल ।। उडा रहें गुलाल लगा
Read Moreप्रेमरंग की बौछार रंगपंचमी सद्भाव की बहार रंगपंचमी । आनंद मय हो जीवन हमारा ऐसी शुभकामना है रंगपंचमी ।। गेर
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