रक्षा बंधन विषयक हाइकु
ताकती द्वार बहन अश्रुधार भाई का प्यार । सजी कलाई हँस पड़ी अँखियाँ राखी जो आई । डाकिया आया राखी
Read Moreताकती द्वार बहन अश्रुधार भाई का प्यार । सजी कलाई हँस पड़ी अँखियाँ राखी जो आई । डाकिया आया राखी
Read Moreहूँ मुस्कुराती आज भी बेपनाह, उसकी यादों और बातों के साथ छोड़ दी उम्मीद उसकी आने की, जी लूंगी उसकी
Read Moreबदले मौसम की तरह चल दिया वो किसी और की तलाश में करता था दावा खुश्बू की तरह बसने की
Read Moreउमड़ते घुमड़ते झूमते चले आओ रे मेघ उष्णता धरा की आकर बुझा जाओ रे मेघ प्यासी है धरा, बूँद बूँद
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