ग़ज़ल
मिलके यूं तुमसे मैं कहीं खोने लगाखुद को भुला कर दूर खुद होने लगाकल रात तेरी जागकर बातें हुयीहमराज बनके
Read Moreमुसीबत में_ कोई नहींसीता के रखवाले राम थे;जब हरण हुआ तब कोई नहींद्रौपदी के पाँच पाण्डव थे;जब चीर हरा तब
Read Moreतुम्हारे नाम ये आखिरी खत,लिख रहा हूँ दिल की स्याही में डूबो कर,शब्द कांप रहे हैं कागज़ पर,पर जज़्बात बहते
Read Moreसमय का साथ सच का हो तो सच उपहार देता हैअगर झूठों की हो संगत तो वो दुत्कार देता हैवो
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