कर्म पथ पर
कर्म पथ पर हमेशा मैं चलती रहूंगी | धर्म कर धर्म के संग बढ़ती रहूंगी | चलो माना कि पथ
Read Moreकर्म पथ पर हमेशा मैं चलती रहूंगी | धर्म कर धर्म के संग बढ़ती रहूंगी | चलो माना कि पथ
Read Moreपलकों में ही अश्रु संजोकर पीना सीख लिया , रोते – रोते हँसकर मैंने जीना सीख लिया, तेरी खुशियों में प्रिय
Read Moreहमारे लिए गर्मी की छुट्टियों में हिल स्टेशन तथा सर्दियों में समुद्री इलाका हमारा ननिहाल या ददिहाल ही हुआ करता
Read Moreचले आओ कि तेरे बिन कहीं अच्छा नहीं लगता | कि सपने देखती तो हूँ मगर सच्चा नहीं लगता |
Read Moreहमारे बुजुर्ग हमारे धरोर हैं..! जिन्होंने अपने सुन्दर घर बगिया को अपने खून पसीने से सींच सींच कर उसे सजाया
Read Moreजिन भावों में हित की भावना समाहित हो वही साहित्य है तथा उन भावों को शब्दों में पिरोकर प्रस्तुत करने
Read Moreबरस गयो रे सखी सावन की बदरी | भीगा मेरा तन मन भीग गई चुनरी || लाई पुरवाई साजन का
Read Moreमिरे दिल के तार तुमसे जुड़ गये न जाने कैसे | सुनो प्रेम प्रेम तुमसे हो गया न जाने कैसे
Read Moreरूप अपना मैं अक्सर बदलती रही ************************** रूप अपना मैं अक्सर बदलती रही आपमें ही हमेशा मैं ढलती रही माला
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