हाथ बढ़ा प्रभु मंगल कीजै (दोधक छंद) गणावली
है अति बेकल नैन हमारे।दर्शन को प्रभु राम तुम्हारे।।देकर दर्शन काज सँवारो।नाथ हमें भव से अब तारो।। थाल सजाकर मैं
Read Moreहै अति बेकल नैन हमारे।दर्शन को प्रभु राम तुम्हारे।।देकर दर्शन काज सँवारो।नाथ हमें भव से अब तारो।। थाल सजाकर मैं
Read Moreभादों माह कृष्ण अष्टमी को,देवकीनंदन जन्म लिए हैं।कारागार के बंधन टूटे,द्वारपाल सब औंधे पड़े हैं। लेकर टोकरी में कान्हा को,
Read Moreत्यागकर व्यग्रता को अब तुम,मनन करना शुरु करो।कठिन परीक्षा अभी बहुत है,मन को तुम धीर करो।खोल कर ईक्षण को अपने,आप
Read Moreशहीदों की कहानी, सुनो मेरी जुबानी।देश के खातिर जिसने, दे दीअपनी जिंदगानी।आओ बच्चों तुम्हें सुनाए, उनकी अमर कहानी।शहीदों की ……………..
Read Moreजनक दुलारी, हे सुकुमारी,कैसे तुम,वन को जाओगी।पंथ कटीले,अहि जहरीले,कैसे तुम,रैन बिताओगी।।सुन प्रिय सीते, हे मनमीते,आप वहाँ,रह ना पाओगी।विटप सघन है,दुलभ
Read Moreदेश की आजादी को अगरअक्षुण्ण बनाए रखना है।तो सोच-समझ व जाँच-परखकरनेता को हमें चुनना है।। अपनी पिछली पीढियों केत्यागों का
Read Moreअब सुनो हमारी सरकार अपनी आवाम की पुकार कुछ करो काम निर्माण का मिले जन-जन को रोजगार। आजाद हुए हुआ
Read Moreचले आओ पनाहों में,निगाहें राह तकती है। बताए क्या तुझे दिलवर,तुझी में जान बसती है।। सुनो सजना तुझे मैंने, तहे
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