Author: कुमकुम कुमारी "काव्याकृति"

भजन/भावगीत

हाथ बढ़ा प्रभु मंगल कीजै (दोधक छंद) गणावली

है अति बेकल नैन हमारे।दर्शन को प्रभु राम तुम्हारे।।देकर दर्शन काज सँवारो।नाथ हमें भव से अब तारो।। थाल सजाकर मैं

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गीत/नवगीत

शहीदों की कहानी, सुनो मेरी जुबानी

शहीदों की कहानी, सुनो मेरी जुबानी।देश के खातिर जिसने, दे दीअपनी जिंदगानी।आओ बच्चों तुम्हें सुनाए, उनकी अमर कहानी।शहीदों की ……………..

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कुण्डली/छंद

वन गमन (तंत्री छंद)

जनक दुलारी, हे सुकुमारी,कैसे तुम,वन को जाओगी।पंथ कटीले,अहि जहरीले,कैसे तुम,रैन बिताओगी।।सुन प्रिय सीते, हे मनमीते,आप वहाँ,रह ना पाओगी।विटप सघन है,दुलभ

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