दोहे – योगी
1.जीवन सादा जो रखे, वह योगी है आप।मन से करता साधना, हरे पाप संताप॥2.निर्मल मधुमय भावना, योगी की है रीत।जीवन
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Read More1.देवदूत के मायने, परहित के आधार।करते मन से चाह वे, सपने हों साकार।।2.जीवन उनका धन्य है, जो करते पर काज।देवदूत
Read More“वह धूप का टुकड़ा था या नारी की बेचारी अस्मत का साक्षी!” न धूप का टुकड़ा समझ पा रहा था
Read More“एक पृथ्वी-एक स्वास्थ्य हित योग”,भोग भी करो ऐसे जैसे सहज योग,हंसते-गाते रहो, सृष्टि को महकाते रहो,आत्मा महकेगी, तन-मन रहेगा निरोग।
Read Moreहम योग-दीवाने हैं, दुनिया को दिखा देंगेहम योग की महिमा को, सारे जग को सिखा देंगे- संजीवनी बूटी बन, तन-मन
Read More1.योगकरे निरोगतन मन स्वस्थरहिए आनंदितअपनाइए 2.करिएयोग साधनामन से आराधनासूर्य नमस्कारप्राणायाम 3.योगजीवन सादातनाव रहेगा आधादवाइयां कमव्यायाम — लीला तिवानी
Read Moreरुक्मणि हूँ, तेरी पटरानी हूँ, न बन सकी तेरे मन की रानी,हे घनश्याम घन बन बरसो द्वारिका में, पहनूं चुनरिया
Read Moreवो भी क्या खूबसूरत दिन थे!जब फ़ुरसत-ही-फ़ुरसत होती थी,कहां गए फ़ुरसत के वो दिन जिनमें,न गुस्सा आता था, न रंजिश
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