Author: *लीला तिवानी

कविता

तू लीला, मैं लीलाधर

कन्हैया रात सपने में आया,क्या अनोखा नजारा था,कन्हैया मुझे निहार रहा था,मैंने कन्हैया को निहारा था। मोरमुकुट वाले बंसी-बजैया,नाग-नथैया, धेनु-चरैया,सामने

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