मैं नदी हूँ
विधा – बाल कविताविषय – मैं नदी हूँ मैं नदी हूँपर्वतों से निकलती हूँखेतों और घाटियों से होती हुईआगे बढ़ती
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Read Moreजीवन एक रंगमंच है,हर इंसान मात्र कठपुतली,जिसकी डोर ईश्वर के हाथ में,हर इंसान सिर्फ एक मोहरा है,जिसका नियंत्रण ईश्वर के
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- गिरगिट जैसे रंग बदलते नेता रंग बदलते गिरगिट जैसे,उनको नेता कहते हैं,नहीं दिखाते असली चेहरा,मुखौटा पहने रहते हैं।
Read Moreकुछ मुक्तक- 481.उम्मीदेंजब मन से बंधती उम्मीदों की डोर,होंगे सपने सच सारे, कहती है भोर,ये सपने ही, हमें सफलता दिलाएंगे,उम्मीदें
Read Moreविधा- बाल कविताशीर्षक- तितली रानी मैं रंग बिरंगी तितली रानी, फूलों का रस लेती हूँ,कहते सभी सयानी हूँ, बच्चों को
Read Moreविधा- लघुकथाशीर्षक- कमीज का कॉलर देवी को पता था कि उसके माता-पिता, भाई-बहन कोई नहीं है और वह रिश्ते की
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- सफलता की सीढ़ियां जब मन से बंधती उम्मीदों की डोर,होंगे सपने सच सारे, कहती है भोर,ये सपने ही,
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