अब सावन को आने दो
बालक-से सूरज अलबेले,सुबह तो लगते बिल्कुल भोले ।जेठ-दुपहरी की वेला में,बरसाते हैं आग के गोले ॥ सुबह फैलाएं मधुरिम लाली.अब
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Read Moreउमड़ घुमड़ घन आए गगन में मन मेरा लहराए।मन में उमंगें, तन में तरंगें, कारे बदरा लाए।पिया-मिलन की ऋतु अलबेली,
Read Moreअंदाज मेरी मोहब्बत का सबसे ही निराला हैकभी उष्ण एहसास है कभी शीतल जल धारा है। सपनों की महफिल में
Read Moreदेवों के देव महादेव शिव, कल्याण सभी का करते हैंदेवेश्वर हैं विश्वेश्वर शिव, कल्याण सभी का करते हैं- शिव जी
Read Moreकल्पना के तुरंग पर होकर सवार, शब्द चले आते हैं,अपनी अहमियत बताकर, हमें सचेत कर संवार जाते हैं.कभी सूर्य-सम तेजवान,
Read Moreआज अम्मा बहुत खुश नजर आ रही थी, लेकिन कुछ दिन पहले तक क्या सोच रही थी!“फसल तो अच्छी हुई
Read More“वह धूप का टुकड़ा था या नारी की बेचारी अस्मत का साक्षी!” न धूप का टुकड़ा समझ पा रहा था
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