कविता – नीरज गोपाल
नीरज साहित्य गगन सम विशालजन्मशती श्री नीरज जी कीदो सदियों के गीतकार नायकपद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानितगीतों-गजलों-कविताओं के गायकदर्शन
Read Moreनीरज साहित्य गगन सम विशालजन्मशती श्री नीरज जी कीदो सदियों के गीतकार नायकपद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानितगीतों-गजलों-कविताओं के गायकदर्शन
Read Moreतेरे डिंपल में कैद है मेरा सारा सुकून,तुम पास आओ तो सुकून भी पा जाऊं,भटकता फिरा हूँ जिस सुकून को
Read More1.देवदूत के मायने, परहित के आधार।करते मन से चाह वे, सपने हों साकार।।2.जीवन उनका धन्य है, जो करते पर काज।देवदूत
Read More1.जीवन सादा जो रखे, वह योगी है आप।मन से करता साधना, हरे पाप संताप॥2.निर्मल मधुमय भावना, योगी की है रीत।जीवन
Read More1.देवदूत के मायने, परहित के आधार।करते मन से चाह वे, सपने हों साकार।।2.जीवन उनका धन्य है, जो करते पर काज।देवदूत
Read More“वह धूप का टुकड़ा था या नारी की बेचारी अस्मत का साक्षी!” न धूप का टुकड़ा समझ पा रहा था
Read More“एक पृथ्वी-एक स्वास्थ्य हित योग”,भोग भी करो ऐसे जैसे सहज योग,हंसते-गाते रहो, सृष्टि को महकाते रहो,आत्मा महकेगी, तन-मन रहेगा निरोग।
Read Moreहम योग-दीवाने हैं, दुनिया को दिखा देंगेहम योग की महिमा को, सारे जग को सिखा देंगे- संजीवनी बूटी बन, तन-मन
Read More1.योगकरे निरोगतन मन स्वस्थरहिए आनंदितअपनाइए 2.करिएयोग साधनामन से आराधनासूर्य नमस्कारप्राणायाम 3.योगजीवन सादातनाव रहेगा आधादवाइयां कमव्यायाम — लीला तिवानी
Read Moreरुक्मणि हूँ, तेरी पटरानी हूँ, न बन सकी तेरे मन की रानी,हे घनश्याम घन बन बरसो द्वारिका में, पहनूं चुनरिया
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