लघुकथा – खामोशी की डगर!
“वह धूप का टुकड़ा था या नारी की बेचारी अस्मत का साक्षी!” न धूप का टुकड़ा समझ पा रहा था
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Read More“एक पृथ्वी-एक स्वास्थ्य हित योग”,भोग भी करो ऐसे जैसे सहज योग,हंसते-गाते रहो, सृष्टि को महकाते रहो,आत्मा महकेगी, तन-मन रहेगा निरोग।
Read Moreहम योग-दीवाने हैं, दुनिया को दिखा देंगेहम योग की महिमा को, सारे जग को सिखा देंगे- संजीवनी बूटी बन, तन-मन
Read More1.योगकरे निरोगतन मन स्वस्थरहिए आनंदितअपनाइए 2.करिएयोग साधनामन से आराधनासूर्य नमस्कारप्राणायाम 3.योगजीवन सादातनाव रहेगा आधादवाइयां कमव्यायाम — लीला तिवानी
Read Moreरुक्मणि हूँ, तेरी पटरानी हूँ, न बन सकी तेरे मन की रानी,हे घनश्याम घन बन बरसो द्वारिका में, पहनूं चुनरिया
Read Moreवो भी क्या खूबसूरत दिन थे!जब फ़ुरसत-ही-फ़ुरसत होती थी,कहां गए फ़ुरसत के वो दिन जिनमें,न गुस्सा आता था, न रंजिश
Read Moreविद्यालयों में नीतिगत शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि छात्रों में नैतिकता और अनुशासन का संचार हो. नीतिगत शिक्षा से छात्रों
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