सफलता की सीढ़ियां
विधा- कविताशीर्षक- सफलता की सीढ़ियां जब मन से बंधती उम्मीदों की डोर,होंगे सपने सच सारे, कहती है भोर,ये सपने ही,
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Read Moreकुछ मुक्तक- 471.सद्भावनासद्भावना से कायम धरती,यह भेद नहीं कोई करती,जग-जीवन को सुदृढ़ करती,हम धरती पर क्यों भार बनें?लीला तिवानी2.समभावसद्भावना से
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- अभिलाषा है यह मेरी सर्वजनहिताय-सर्वजनसुखाय कर्म हों,सत्य-अहिंसा-मधुर वचन, सुधर्म हों,हर्षित हों सबके मन, हो देश का हित,अभिलाषा है
Read Moreप्रभु का बारंबार आभार विधा- कविताशीर्षक- प्रभु का बारंबार आभार जिसने जीवन दिया सभी को,उस प्रभु का बारंबार आभार,जीवन दिया,
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- क्यों न खुश होकर जिया जाए! सुख आमंत्रित हैं, आहूत हैं,आते भी हैं,हर्षाते भी हैं,पर जब तक होते
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- तीजों का त्योहार मेंहदी की महक, हरी चूड़ियों की खनक,सुहाग का सिंदूर, मंगलसूत्र का उपहार,हरियाली तीज, नैनों में
Read Moreशशिधर-श्याम एक तत्व जगत-नियंता एक हैं, चाहे भिन्न हों नाम,देते हैं संदेश सभी हमें, प्रेम है सुख का धाम,शशिधर-श्याम एक
Read Moreविधा : हास्य काव्यस्वरूप : पहेली शैलीबैन (वचन, वाणी) सुबह उठते ही साथ में उठते,रात को सोते ही साथ में
Read Moreअभिव्यक्तिमनकी दुर्जन दर्पण सम सदा,करि देखौ हिय गौर।संमुख की गति और है, विमुख भए पर और॥ दुष्ट व्यक्ति दर्पण के
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