कविता

सफलता की सीढ़ियां


विधा- कविता
शीर्षक- सफलता की सीढ़ियां

जब मन से बंधती उम्मीदों की डोर,
होंगे सपने सच सारे, कहती है भोर,
ये सपने ही, हमें सफलता दिलाएंगे,
उम्मीदें ही तो हैं जीवंतता का छोर।

रुकावटें आती है सफलता की राहों में,
यह कौन नहीं जानता है,
फिर भी वह मंजिल पा ही लेता है
जो हार नहीं मानता है।

सफलता का सोपान है निरंतर चलते जाना,
निश्चित लक्ष्य लेकर आगे बढ़ते जाना,
मंजिल मिलने से पहले रुकना नहीं,
असफलता के आगे कभी झुकना नहीं।

बड़े काम की सीढ़ियां ऊपर ले जाती हैं,
वही सीढ़ियां नीचे भी ले आती हैं,
संभलकर चढ़ना इन सीढ़ियों पर,
जरा संतुलन बिगड़ा तो गिरा भी जाती हैं।
स्वरचित और मौलिक
लीला तिवानी
सम्प्रति ऑस्ट्रेलिया

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244