साथ
कितनी दूर निकल आए हम चलते चलते मंजिलें कुछ नई हैं ,रास्ते भी एक दिन था जब देखा करते थे
Read Moreहम क्यूँ लिखे अपनी मजबूरियां, क्यूँ लिखें कि वो ध्यान नहीं रखता मेरे वजूद का हम क्यूँ लिखें कि हम
Read Moreहम हमेशा साथ रहेंगे हों चाहे पर्वत की ऊँचाइयाँ या फिर हों सागर की गहराइयाँ नदियों में दिखती हों परछाइयाँ
Read Moreगुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरा गुरुर्साक्षात परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः गुरु ही सब कुछ है।दुनिया में हर क्षेत्र में, कहीं
Read Moreजो अपनी पहले वाली पीढ़ी से प्राप्त हो, वही उत्तराधिकार है। ये उत्तराधिकार की व्यापक परिभाषा है।अर्थ और संपत्ति प्रधान
Read Moreहर साल 1 जनवरी को बार बार लोग सनातन संस्कृति का हवाला देकर नववर्ष का स्वागत करने से रोकते हैं
Read Moreबहते पत्थर।पता है क्यूं? हम सब बहते पत्थर ही तो हैं।समय की नदी के साथ बहते हुए पत्थर।जैसे नदी अपने
Read More