नदी और किनारा
कल-कल, छल-छल करती दरियापर्दादारी करती, अपना भेद छुपाती बढ़ती जातीअपना भेद छुपाती, नहीं खोलती राज अपने दिल काऊपर-ऊपर हँसती, किनारों
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Read Moreयकीं है किसी मोड़ पर तुम मिलोगे।रुकने को मुझे आवाज़ दोगे।। मैं ना रुकना चाह कर भी ठिठक जाऊंगी।तुम लच्चछेदार
Read Moreन जीते न हारे जिन्दगी जीते रहे।जिन्दगी के ईशारों पर नाचते रहे।। बीते कल की कहानी दुहराते रहे।आज की सुधि
Read Moreअपने सिद्धांतों पर जीते रहेदकियानूसी रिवाजों से हटाते रहे रिश्ता निभाया कभी तो दिल सेनफा नुकसान कभी सोचा न दिल
Read Moreदिल करता है तेरे आस-पास ही रहूं l चाहे क्यों न तुलसी बनकर ही रहूंl ज्यादा नहीं बस तेरे हाथों
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