Author: *मनमोहन कुमार आर्य

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

वेद वर्णित ईश्वर की न्याय-व्यवस्था आज भी सर्वत्र प्रभावी है

ओ३म् हमारा यह संसार स्वयं नहीं बना अपितु एक सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, अनादि, नित्य, न्यायकारी तथा दयालु सत्ता जिसे

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

धर्म सत्कर्तव्यों के ज्ञान व पालन और असत् कर्मों के त्याग को कहते हैं

ओ३म् धर्म के विषय में तरह तरह की बातें की जाती हैं परन्तु धर्म सत्याचरण वा सत्य कर्तव्यों के धारण

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सामाजिक

हमारे गुरुकुल सुरक्षित रहेंगे तभी हमारा धर्म भी सुरक्षित रहेगाः वेदवसु शास्त्री

ओ३म् आर्यसमाज राजपुर-देहरादून का वार्षिकोत्सव ========= आर्यसमाज, राजपुर-देहरादून दिनांक 1-1-2016 को स्थापित उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून का सबसे नया आर्यसमाज

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सामाजिक

ऋषि दयानन्द ने संसार को अमृत पिलाया और स्वयं विष पी लियाः आचार्या अन्नपूर्णा

ओ३म् –आर्यसमाज राजपुर देहरादून का वार्षिकोत्सव सम्पन्न– आर्यसमाज, राजपुर–देहरादून का वार्षिकोत्सव रविवार दिनांक 27-12-2020 को सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस समाज

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ऋषि दयानन्द ने सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ मत-मतान्तरों की अविद्या दूर करने के लिये लिखा था

ओ३म् ऋषि दयानन्द सरस्वती जी का सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ देश देशान्तर में प्रसिद्ध ग्रन्थ है। ऋषि दयानन्द ने इस ग्रन्थ को

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

जिस प्रयोजन के लिये परमात्मा ने जीवन दिया है उसे करना ही धर्म एवं कर्तव्य है

ओ३म् मनुष्य जन्म लेता है परन्तु उसे यह पता नहीं होता कि उसके जन्म लेने व परमात्मा के जन्म देने

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

संसार को ईश्वर की सत्ता का परिचय सर्वप्रथम वेदों से मिला है

ओ३म् हमारा यह संसार 1.96 अरब वर्षों से अधिक समय पूर्व बना था। तब से यह जीवों के आवागमन व

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धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

यम नियमों का पालन किये बिना भक्ति व उससे लाभ होना असम्भव

ओ३म् मनुष्य ईश्वर का बनाया हुआ एक चेतन प्राणी है जिसके पास पांच ज्ञान एवं पांच कर्म इन्द्रियों से युक्त

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