मुक्तक/दोहा *डॉ. मनोज श्रीवास्तव 06/10/202506/10/2025 मुक्तक सितम कोई नया जब जब भी वो ईजाद करते हैंहमारी खुशनसीबी है वह हमको याद करते हैंनहीं करते कोई शिकवा Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. मनोज श्रीवास्तव 06/10/202506/10/2025 गजल तुम मुझे भूल भी जाओ तो बात बन जाएयाद भी मुझको ना आओ तो बात बन जाए पिला रही है Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. मनोज श्रीवास्तव 15/09/202515/09/2025 ग़ज़ल खुद अपनी क्षमता से बढ़ कर बोझ उठाना ठीक नहीरातो -दिन सपनो का बुनना ताना बाना ठीक नही पैसा प्यार Read More
क्षणिका *डॉ. मनोज श्रीवास्तव 14/09/202514/09/2025 क्षणिका हम सारे ही सफर में रहते हैंमंजिल का किसी को पता नहीं होतागाड़ी रफ्तार से चलती रहतीकहां उतरना है यह Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. मनोज श्रीवास्तव 26/08/202526/08/2025 ग़ज़ल दुनिया का बहुरंगी रेला लगा हुआ हर तरफ है मेलादिखती हैं हर ओर भीड़ सी फिर भी हर इंसान अकेला Read More
गीत/नवगीत *डॉ. मनोज श्रीवास्तव 01/07/202529/06/2025 गीत आज हृदय ने गागर बन कर छलकाया है नाम तुम्हारा बुझ न पाई थी प्यास की सूना हुआ हृदय सागर Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. मनोज श्रीवास्तव 20/06/202520/06/2025 ग़ज़ल शेर जो इंतिख़ाब होते हैंखुद ही अपना जवाब होते हैं जो मुस्कुराते हैं साथ कांटो केवही असली गुलाब होते हैं Read More
कविता *डॉ. मनोज श्रीवास्तव 03/05/202503/05/2025 कविता अब सेना को तय करना है कब कैसे बदला लेना हैपहलगाम में हुए दिवंगत पर्यटकों की आत्मा की शांति को Read More
मुक्तक/दोहा *डॉ. मनोज श्रीवास्तव 27/04/202529/04/2025 मुक्तक युग बदला बदले समीकरण माने सम्मान के बदल गएसम्मान का मतलब क्या होता है कोई ज्ञानी बतलायेगा इसमें तो होगा Read More
गीतिका/ग़ज़ल *डॉ. मनोज श्रीवास्तव 26/04/202529/04/2025 किरदार की तरह हम हो गए हैं नाटक के किरदार की तरहपढ़ते हैं लोग हमको भी अखबार की तरह बजती नहीं है तालियां Read More