क्षणिका
हम सारे ही सफर में रहते हैं
मंजिल का किसी को पता नहीं होता
गाड़ी रफ्तार से चलती रहती
कहां उतरना है यह भी पता नहीं होता
— डॉक्टर इंजीनियर मनोज श्रीवास्तव
हम सारे ही सफर में रहते हैं
मंजिल का किसी को पता नहीं होता
गाड़ी रफ्तार से चलती रहती
कहां उतरना है यह भी पता नहीं होता
— डॉक्टर इंजीनियर मनोज श्रीवास्तव