रात
दिन के सभी पहर से ज्यादा मुझे रात ही अच्छी लगती है एक यही तो पहर है जब वो होती
Read Moreवो कहते हैं कभी लिखना मत छोड़ना हम रहे न रहे जहां में कोरे कागज पे अपने जज्बातों को रखना
Read Moreसबसे पहला हक़ है तुम्हारा अरे एक बार अपना हक़ जताकर तो देखो न जाने दूंगा वापिस कभी तुमको कम
Read Moreक्यों चाहा उसे जो मोहब्बतों के काबिल न थी आंधियों का जज़्बा थी वो प्रेम का सागर न थी हम
Read Moreआज महफ़िल से किसी एकांत में मैं जरूर जाना चाहता हु वो चेहरा जिसने जीते जी कुछ न दिया जख्मो
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