कविता : नश्वरता
नश्वरता … न करती प्रतीक्षा, न मुड़ती, देखती पीछे| क्षीण बड़ी ही लहरों की आयू| पल भर का बचपन, क्षणभर
Read Moreनश्वरता … न करती प्रतीक्षा, न मुड़ती, देखती पीछे| क्षीण बड़ी ही लहरों की आयू| पल भर का बचपन, क्षणभर
Read Moreग़लती सारी नहीं दहेज़ मांगने वालों की कुछ तो ग़लती रही होगी उनकी भी जो लाड़-लाड़ में, दिखावे में लाद
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